क्या मणिपुर में पुलिस के सामने किया गया था महिलाओं को निर्वस्त्र?

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मणिपुर से जिस तरह की तस्वीरें और वीडियो सामने निकल कर आ रही हैं उसे देखकर लोगो की रूह कांप जा रही हैं। लेकिन इस घटना पर एक और दावा किया जा रहा हैं और दावा यह है की जिस समय यह अमानवीय घटनाए हो रही थी उस समय मणिपुर पुलिस भी वहा मौजूद था। लेकिन उन्होंने महिलाओं को बचाने की कोशिश तक नहीं की।

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मणिपुर पिछले कई महीनों से जातिय हिंसा की आग में जल रहा हैं। राज्य के मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा इतनी बढ़ गई है की आज ये लोग एक दूसरे के जान के दुश्मन बन गए हैं।

राज्य के जातीय हिंसा का एक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा हैं। जिसे देखकर हम राज्य की स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। वीडियो प्रदेश में बीते तीन मई, दो हजार तेईस को मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के अगले दिन यानी चार मई की है। लेकिन सबसे बड़े दो सवाल इस समय लोगो के जेहन में है।

पहला क्यों इस अमानवीय घटना को लोगो के सामने आने में महीनों लग गए? और दूसरा सवाल क्या यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुई थी?

इस देश की सरकारें इंटरनेट शटडाउन करने में दुनिया भर के देशों में शीर्ष पर हैं और यही कारण है की यह खबर घटना के सतहतर (77) दिन बाद लोगो तक पंहुचा। क्योंकि प्रदेश में तीन मई, दो हजार तेईस से इंटरनेट बंद था।

वीडियो में जिन कुकी समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया जा रहा हैं और उनका शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा हैं। उनके पिता और भाईयो को भिड़ ने मार डाला था।

दोनो पीड़ित महिलाओं ने द वायर को दिए एक इंटरव्यू में कहा की, मणिपुर पुलिस अपराध स्थल पर मौजूद थी, लेकिन उन्होंने उनकी मदद नहीं की। पीड़ित महिलाओं ने बताया की, चार पुलिसकर्मियों को कार में बैठे देखा था, जो हिंसा होते हुए देख रहे थे। उन्होंने हमारी मदद के लिए कुछ नहीं किया।

हालाकि इस मामले में बीते बीस जुलाई को एक ट्वीट में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने दावा किया है की, पुलिस ने घटना के संबंध में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जबकि यह मामला बीते चार मई, दो हजार तेईस का हैं । और वीडियो उन्नीस जुलाई को सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी और मुख्यमंत्री का ट्वीट वायरल वीडियो के ठीक एक दिन बाद आया था।

मणिपुर की इस बढ़ती हिंसा पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। और उन पर कई आरोप भी लग रहे हैं। साथ ही प्रशासन पर भी कई आरोप लग रहे है। कुकी समुदाय के लोगो का दावा है की मणिपुर पुलिस ने मेईतेई समुदाय का पक्ष लिया है।

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