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शिक्षक तालमेल कमेटी तफ़्तीश में शामिल होने के लिए पहुंची थाना शहर।
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बताते चलें कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी हरियाणा सरकार ने प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान मूलनिवासी सुरेश द्रविड़ पर 124 ए राजद्रोह का मामला दर्ज किया हैं। जिसके विरोध में जन शिक्षा अधिकार मंच के द्वारा लगातार पांच महीने से जिला मिनी सचिवालय पर रात्रि पड़ाव जारी है। सुरेश द्रविड़ मुकदमे की तफ्तीश में शामिल होने के लिए बीते 22 फरवरी को शिक्षक तालमेल कमेटी थाना शहर पहुंची।
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बीते 22 फरवरी, 2023 दिन बुधवार को सुरेश द्रविड़ पर दर्ज राजद्रोह के मुकदमे की तफ्तीश में शामिल होने के लिए शिक्षक तालमेल कमेटी थाना शहर पहुंची।
बताते चलें कि शिक्षिक तालमेल कमेटी द्वारा पिछले साल 8 सितंबर को चिराग योजना, ट्रांसफर पॉलिसी एवम नई शिक्षा नीति के विरोध में राज्यमंत्री कमलेश ढांडा के आवास पर शिक्षकों द्वारा प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन दिया गया था।
जिसमें प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान मूलनिवासी सुरेश द्रविड़ ने भी चिराग योजना व नई शिक्षा नीति के विरोध में अपनी बात रखी थी। उसी को आधार मानकर राज्य मंत्री कमलेश डांडा द्वारा पहले सुरेश द्रविड़ को निलंबित करवाया गया और इसके बाद शिक्षकों की आवाज को एवम शिक्षा के मुद्दों को दबाने के लिए 23 सितम्बर, 2022 को राज्य मंत्री कमलेश ढांडा के निर्देश पर सुरेश द्रविड़ के ऊपर 124 ए राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया। सुरेश द्रविड़ पर लगाये गए राजद्रोह के मुकदमे को हटाने के लिये लगभग पांच महीनों से जन शिक्षा अधिकार मंच के द्वारा
जिला मिनी सचिवालय पर रात्रि पड़ाव जारी है।
बताते चले कि सुरेश द्रविड़ पर लगे 124ए राजद्रोह के मुकदमे की तफ्तीश के लिए बीते बुधवार उन्हें थाना शहर में बुलाया गया। उनके साथ शिक्षक तालमेल कमेटी के सभी साथी थाना शहर पहुंचे। जिनमें मुख्य रूप से शिक्षक तालमेल कमेटी के जिला संयोजक सतबीर गोयत, विजेंद्र मोर ,सुरेश द्रविड़, रमेश चहल , शमशेर कालिया, अमरनाथ किठानिया, टीपू सामरिया समेत सैकड़ो लोग उपस्थित हुए।
बताते चले की सर्वोच्चय न्यायालय में छह वकील सुरेश द्रविड़ मामले में पैरवी कर रहे हैं। जिनमे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट डॉ० के एस चौहान, एडवोकेट अजित कुमार एका, एडवोकेट आरएसएस किल्क मीणा, प्रोफेसर डॉ० के ईलूमलाई, डॉ अभिषेक चौहान , और अजित कुमार जिनवाल शामिल हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा लगाए गए राजद्रोह के मुकदमे के बाद सुरेश द्रविड़ ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करते हुए उनपर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की हैं।
सुरेश द्रविड़ ने अपनी बात रखते हुए कहा था की, “सर्वोच्चय न्यायालय अपने 11 मई, 2022 के आदेश में राजद्रोह के अंतर्गत एफआईआर दर्ज नहीं करने को कहा था।”







