===========
मक्कम ने निर्धारित दस बिंदुओं पर की चर्चा।
मक्कम के राष्ट्रीय महासचिव रहे उपस्थित।
=============
बीते 29 जनवरी, 2023 को मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ (मक्कम) की पूर्व विदर्भ की बैठक व प्रशिक्षण कार्यकम सफलतापूर्वक संपन्न हुई। जिसमें मक्कम द्वारा कर्मचारियों और समाज हित के लिए निर्धारित किये गए दस बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुईं।
=============
दिनांक 29 जनवरी, 2023 दिन रविवार को स्थान रविभवन कॉन्फ्रेंस हॉल, सिविल लाइन्स, नागपुर में मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ का एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
इस कार्यक्रम में मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ ने कर्मचारियों और समाज कल्याण के लिए निर्धारित दस बिंदुओं पर चर्चा करने के साथ-साथ कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा की।
इस विशेष कार्यक्रम में नागपुर समेत वर्धा, यवतमाल, अमरावती, भंडारा, चंद्रपुर, गडचिरोली, गोंदिया व नंदुरबार आदि जिलों के कई कर्मचारी प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस मौके पर मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ (मक्कम) के राष्ट्रीय महासचिव मूलनिवासी पुष्पराज दहीवले सर और राज्य इकाई महाराष्ट्र सचिव मूलनिवासी हेमकांत मोरे सर भी उपस्थित रहे ।
मूलनिवासी पुष्पराज दहीवले और मूलनिवासी हेमकांत मोरे सर ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कर्मचारियों की महत्वपूर्ण समस्याओं और उनका समाधान कैसे किया जाय ?इसपर विशेष चर्चा की।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नागपुर के प्रोफेसर मोटघरे सर भी उपस्थित रहे। प्रो० मोटघरे सर ने लोगो को लोकतान्त्रिक व्यवस्था के बारे में संबोधित किया।
बताते चले कि मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ मूलनिवासी कर्मचारियों का एक राष्ट्रीय स्तरीय संगठन हैं। यह संगठन मूलनिवासी कर्मचारियों औऱ मूलनिवासी समाज के हित की रक्षा के लिए हमेसा तैयार रहता हैं।
मक्कम के 10 एजेंडा पॉइंट्स हैं जो निम्नलिखित हैं।
1- पदोन्नति में अन्य पिछडों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व व क्रीमीलेयर का उन्मूलन!
2- मन्डल मामले में इन्द्रा साहनी मुकदमे में अनुच्छेद 16(4) में दिए प्रतिनिधित्व को मूल अधिकार बताने वाले सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के निर्णय को न्यायपालिका लागू करे!
3- सरकारी अर्धसरकारी व स्वायत्तशासी तन्त्र में नौकरियां में हर स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का अधिनियम बनना आवश्यक!
4- संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुपालन में भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की तत्काल आवश्यकता!
5- केन्द्र व राज्य सरकारों के अधीन सभी पदों में आरक्षित पदों के बैकलाग को अविलंब भरना आवश्यक!
6- निजीकरण तत्काल बंद कर सभी सरकारों के उपक्रमों आदि का प्रशासन व नियन्त्रण अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछडों के अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के सुपुर्द करके सक्षम बनाना!
7- सभी मन्त्रिपरिषदों में मूलनिवासी जातियों के उनकी आबादी के प्रतिशत के बराबर मंत्री होना उनका अधिकार है!
8- नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू करना सरकारी कर्मचारियों के हित में आवश्यक!
9- सभी तरह के सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों के लिए संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत कानून बनाना संवैधानिक आवश्यकता!
10- अनुसूचित जातियों अनुसूचित जनजातियों व अन्य पिछड़े वर्गों के सरकारी कर्मचारियों की संस्थाओं को सर्व उद्देशीय मान्यता आवश्यक!








