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आज कल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक युवक का पैर धो रहे है। उन्हे अपने साथ बैठा कर खाना खिला रहे हैं। आखिर क्यों ? क्या मूलनिवासी युवक के पैर धोकर शिवराज सिंह चौहान ने अपने खिलाफ उठने वाले एक बड़े विरोध प्रदर्शन को रोका है?
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आपने अभी तक वो वीडियो जरूर देखा होगा जिसमे एक युवक एक दूसरे युवक पर पेशाब करता हुआ दिख रहा हैं । दरअसल यह घटना मध्य प्रदेश के सीधी जिले की है जहा प्रवेश शुक्ला नामक एक व्यक्ति एक मूलनिवासी (आदिवासी ) युवक पर पेशाब कर रहा हैं।
आरोपी भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता बताया जा रहा हैं। जो इस अमानवीय घटना को अंजाम दे रहा हैं। घटना ऐसी जिसे देखकर आरोपी के खिलाफ किसी का भी खून खोल उठे।
इस मामले को दबाने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वे सारे हथकंडे अपना रहे है जो आज तक किसी भी मुख्यमंत्री ने नही किया हैं। लेकिन क्या इन सब से प्रदेश में या देश में ऐसी घटनाए और देखने को नहीं मिलेगी ? या ये सब सिर्फ चुनावी परिस्थिति को देखते हुए की जा रही है।
मालूम हो की मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने वाली हैं और प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी प्रदेश की कुल आबादी का इक्कीस फीसदी हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए प्रदेश के अनुसूचित जनजाति का वोट मायने रखता हैं।
अगर इस मामले में आरोपी की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती और मुख्यमंत्री इस मामले में चुप्पी दिखाते तो सरकार को एक बड़े विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ता । जिसका असर सीधे तौर पर आगामी चुनाव में देखने को मिलता।
जिस प्रकार चुनाव से पहले द्विज नेता मूलनिवासियो के घरों में जाकर दुकान में मिलने वाली प्लेटो में खाना खा कर आते हैं ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मूलनिवासी युवक का पैर धोकर चुनाव से पहले बीजेपी और अपने खिलाफ उठने वाले एक बड़े विरोध प्रदर्शन को बस रोका हैं। आइए समझते हैं, कैसे?
मामला अमानवीय था। वीडियो देखकर किसी का भी खून खोल उठता हैं। मुख्यमंत्री जल्दी कुछ ठोस कदम नहीं उठाते तो मध्य प्रदेश में आफ़त आ जाती। क्योंकि, अनुसूचित जनजाति की आबादी मध्य प्रदेश में लगभग इक्कीस फीसदी से अधिक हैं। मतलब राज्य में हर पांचवा व्यक्ति एस्टी है।
पूरे देश में एस्टी और ओबीसी के हित के लिए अनुसूचित जाति हमेशा खड़ा रहता हैं। जाहिर सी बात हैं, अगर राज्य में अनुसूचित जनजाति इस अमानवीय घटना के खिलाफ सड़क पर उतरती तो राज्य के एससी भी उनके साथ खड़े होते। कुछ जागरूक ओबीसी भी आते जिनके मन से यह भ्रम निकल गया है की वर्ण व्यवस्थ में वो शुद्र नहीं थे। जबकि असल में वर्णव्यवस्था में ओबीसी ही शुद्र थे।
अब एससी और एस्टी की आबादी मध्य प्रदेश में तकरीबन चालीस से पचास फीसदी हैं। अब जरा सोचिए जब राज्य की आधी से अधिक आबादी सड़क पर उतरती तो मध्य प्रदेश सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक हिल जाती।
मुख्यमंत्री शिवराज ने पैर धोकर मामले को शांत किया हैं। आरोपी प्रवेश शुक्ला की गिरफ्तारी काफी नहीं, उनके साथ कुछ ऐसा किया जाए की देश में फिर कभी ऐसी जुर्रत कोई न करें।







