मुश्लिम विरोधी उम्मीदवारों को खड़ा कर क्या साबित करना चाहती हैं भाजपा?

==============

गुजरात में दो चरणों मे होगी विधानसभा चुनाव।

===========

गुजरात विधानसभा चुनाव नजदीक हैं । ऐसे में पार्टियां अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर रही हैं। भाजपा ने भी गुजरात के लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों का नाम घोषित कर चुकी हैं। जिनमें से कुछ नाम ऐसे हैं जो मुश्लिम विरोधी मानसिकता के हैं।

==============

चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा चुनावों की तरीके तय कर दी हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव दो चरणों मे होनी हैं। पहला चरण एक दिसंबर दो हजार बाईस और दूसरा चरण पांच दिसंबर दो हज़ार बाईस को सम्पन्न होगी। चुनाव का परिणाम आठ दिसंबर दो हजार बाईस को आएगी।

सभी चुनावों की तरह इस चुनाव में भी पार्टियां अपने कट्टर हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार खुल कर रही हैं। जिसमे बीजेपी की बी टीम का प्रदर्शन सबसे बेहतरीन रहा । लेकिन देखना होगा कि परिणाम किसके पक्ष में आता हैं। खैर पार्टीयो ने अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा भी कर दिए हैं। जिसमे बीजेपी द्वारा घोषित कुछ नाम मुश्लिम विरोधी मानसिकता के हैं।

इसमें पहला नाम भाजपा विधायक और प्रदेश के पूर्व मंत्री रह चुके चंद्रसिंह राउलजी का हैं। जिसे भाजपा ने पुनः गोधरा से टिकट दिया हैं। यह वही नाम हैं जिसने बिलकीस बानो के बलात्‍कारियों को ‘संस्कारी’ बताया था।

आपको बताते चले कि चंद्रसिंह राउलजी उस चार सदस्यों वाली समिति के सदस्य भी हैं। जिसने बिलकीस बानो के साथ बलात्कार और उनकी तीन साल की बेटी सहित परिवार के सात सदस्यों की हत्या के ग्यारह दोषियों को रिहा करने का फैसला किया था।

इस लिस्ट में दूसरा नाम पायल कुकरानी का हैं। जिसे भाजपा ने नरोदा से निकट देने का फैसला किया हैं। बताते चले कि पायल नरोदा पाटिया दंगा मामले में दोषी क़रार दिए गए सौलह व्यक्तियों में से एक मनोज कुकरानी की बेटी हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि गुजरात में साल दो हजार दो में हुए दंगों के दौरान अहमदाबाद स्थित नरोदा पाटिया इलाके में सन्तानवे मुश्लिमों की हत्या कर दी गई थी। जबकि दंगे में तेतीस लोग घायल हुए थे। इस घटना को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आगजनी के एक दिन बाद अंजाम दिया गया था। इस दंगे में तीस वर्षीय पायल कुकरानी के पिता मनोज कुकरानी भी उन सौलह दोषियों में से एक हैं।

गुजरात हाईकोर्ट ने नरोदा पाटिया दंगा मामले में मनोज कुकरानी और पनद्रह अन्य की दोषसिद्धि को दो हजार अठारह में बरकरार रखा था। लेकिन उम्रकैद की सजा पाने वाले कुकरानी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

मनोज कुकरानी का भाजपा से लंबे समय से जुड़े रहने की खबर आई हैं। इस बात को खुद पायल ने स्वीकारा हैं। टिकट पाने के बाद पायल ने कहा, “मेरी मां एक पार्षद हैं और मेरे माता-पिता लंबे समय से भाजपा से जुड़े हुए हैं। मैंने भी अतीत में चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लिया है।’

गुजरात में मुश्लिम विरोधी राजनीति इसलिए भी की जा रही हैं क्योंकि दो हजार ग्यारह की जनगणना के अनुसार गुजरात मे मुश्लिमो की आबादी दस फीसदी से भी कम हैं। आंकड़ो के मुताबिक गुजरात के कुल आबादी में मुश्लिम समुदाय का प्रतिशत मात्र नौ दशलव छह सात फीसदी हैं। वही सभी छब्बीस जिलों में मुश्लिम अल्पसंख्यक के रूप में हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here