सांसदो और विधायकों के खिलाफ 5000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित।

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बीते दिनों एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष बताया की सांसदों और विधायकों ​के ख़िलाफ़ लंबित पांच हजार संतानवे (5,097 ) मामलों में से चालीस फ़ीसदी से अधिक यानी दो हजार एक सौ बाइस ऐसे मामले हैं जो पिछले पांच साल या उससे अधिक समय से लंबित हैं।

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इस देश की न्याय व्यवस्था इतनी सुस्त हैं की कई मामलों की सुनवाई होते होते सालो लग जाते हैं। लेकिन आज बात उन सांसदो और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की करेंगे जो पिछले कई सालों से लंबित हैं।

बीते दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि सांसदों और विधायकों ​के ख़िलाफ़ लंबित पांच हजार संतानवे (5,097) मामलों में से चालीस फ़ीसदी से अधिक यानी दो हजार एक सौ बाइस (2,122) मामले बीते पांच साल या उससे अधिक समय से लंबित हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (एडीआर) जुलाई, दो हजार बाइस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कोर्ट को बताया की, पांच सौ बयालीस (542) लोकसभा सदस्यों में से चौवालीस प्रतिशत यानी दो सौ छत्तीस (236), दो सौ छब्बीस (226) राज्यसभा सदस्यों में से इकतीस प्रतिशत यानी इकहत्तर (71) और तीन हजार नौ सौ इक्यानवे (3,991) राज्य विधायकों में से तियालिस प्रतिशत यानी एक हजार सात सौ तेईस (1,723) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

बताते चले की एडीआर एक भारतीय गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष उन्नीस सौ निन्यानवे में की गई थी। जिसका उद्देश्य राजनीतिक और चुनावी वकालत के माध्यम से भारत में लोकतांत्रिक सुधार लाना हैं।

इसी संगठन ने पिछले साल राजनीतिक दलों के आयकर रिटर्न और भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष दायर किए गए दान प्राप्ति के विवरणों के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया था की वित्त वर्ष दो हजार चार – पांच (2004-5) और दो हजार बीस – इक्कीस (2020-21) के बीच आठ राष्ट्रीय दलों ने पंद्रह हजार सतहत्तर करोड़ संतानवें लाख (15,077.97 करोड़) रुपये अज्ञात स्रोतों से प्राप्त किए हैं।

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