बौद्ध तथा पाली साहित्य के प्रख्यात अभ्यासक एवं विद्वान डॉ विमलकीर्ति नहीं रहें|

पाली, हिंदी और मराठी में 60 से ज्यादा किताबें प्रकाशित,
प्रख्यात फूले-अम्बेडकरी लेखक अनुवादक

बौद्ध तथा पाली साहित्य के प्रख्यात अभ्यासक एवं विद्वान डॉ विमलकीर्ति नहीं रहें। नजदीकी मित्र मंडली में वे डॉ विमलकीर्ति मेश्राम इस नाम से भी जाने जाते रहे हैं।

प्रख्यात फूले-अम्बेडकरी लेखक अनुवादक डॉ विमलकीर्ति का 14 दिसम्बर को नागपुर में दुखद निधन हुआ। वे 71 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार 14 दिसम्बर को नागपुर में परिवार और अनेक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में बौद्ध परंपरा से अभिवादन करके किया गया।

डॉ विमलकीर्ति राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के पाली भाषा विभाग के पूर्व प्रमुख रहे हैं। उनके द्वारा लिखित, सम्पादित एवं अनुवादित पाली, हिंदी और मराठी में 60 से ज्यादा किताबें प्रकाशित हुयी हैं।

त्रिपिटक का पाली से मराठी में अनुवाद भी उन्होंने किया। फूले आंबेडकर आंदोलन की कई मराठी पुस्तकों का उन्होंने हिंदी में अनुवाद किया है।

उनके असामायिक निधन से फूले-अम्बेडकरी आंदोलन को अपरिमित क्षति हुयी है। एमएनटी न्यूज नेटवर्क और बामसेफ परिवार उनकी स्मृति में विनम्र आदरांजलि अर्पित करता है तथा विनम्र अभिवादन करता है।

जय भीम जय मूलनिवासी जय भारत जय संविधान।

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