भारत युवाओं का देश माना जाता हैं। भारत की आधी से अधिक आबादी युवाओं की हैं। लेकिन सबसे अधिक परेशान, लाचार औऱ बेरोजगार इसी देश के युवा हैं। आज हम भारत के युवाओं की चिंताजनक स्थिति के साथ-साथ युवाओं के राष्ट्रस्तरीय संगठन मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के बारे में भी बात करेंगे। जो स्वयं एससी , एसटी, ओबीसी और कंववर्टेड माइनोरिटीज के सबसे बड़े संगठन बामसेफ के ऑफ शूट विंग्स में से एक हैं।
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सत्ता में रही राजनीतिक पार्टियों द्वारा भारत की राजनीति को ऐसे बनाया गया कि आज पढ़े लिखें या युवा वर्ग इससे अपने आप को दूर रखना ही बेहतर समझते हैं। जबकि किसी भी देश की राजनीति में पढ़े लिखे शिक्षित लोगो और युवाओं का हिस्सा लेना बेहद जरूरी हैं ।
लेकिन आज भारत की राजनीति में पढ़े लिखे शिक्षित लोगो और युवाओं की हिस्सेदारी बहुत ही कम या न के बराबर हैं। जबकि भारत में युवाओं की संख्या देश की कुल आबादी का लगभग आधा हैं।
आज के दौर में भारत केवल सबसे अधिक युवाओं वाला देश नहीं रह गया। बल्कि भारत को सबसे अधिक युवा बेरोजगारों वाला देश भी कहना कुछ गलत नहीं होगा। आज भारत मे रोजगार पाने की स्थिति बद से बदत्तर हैं । देश मे रोजगार की स्थिति इतनी चिंताजनक हैं कि आज इंजीनियर की डिग्री लेने के बाद भी युवा दस – बारह हजार में झाड़ू-पोछा का काम करने के लिए तैयार हैं।
यह सिर्फ एक समस्या नहीं है बल्कि आज के युवा ऐसे कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। जिनकी हर समस्याओं के साथ आज मूलनिवासी विद्यार्थी संघ खड़ा हैं। बताते चले कि मूलनिवासी विद्यार्थी संघ मूलनिवासी यानी देश के एससी, एसटी, ओबीसी और कनवर्टेड माइनोरिटीज के विद्यार्थियों का सबसे बड़ा राष्ट्रस्तरीय संगठन हैं।
यह संगठन स्वयं बामसेफ जैसे विशाल संगठन के कई ऑफ शूट विंग्स में से एक हैं। जिसकी देश भर में कई इकाईयां निरंतर कार्य कर रही हैं।
बीते दिनों मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष इंजिनीरिंग ललित कुमार ने बताया कि जौनपुर, उत्तर प्रदेश में मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के कार्यकर्ता कुछ ऐसे विद्यार्थी तैयार कर रहे हैं। जो अवश्य ही कल के भारत भाग्य विधाता होंगे।
उन्होंने कहा कि, वकालत के बादशाहों को जो आज तक कंठस्थ नहीं हुआ, आज ये नन्हें से युग परिवर्तक जांबाज बेहिचक बे अटक अपने भारत के संविधान की उद्देशिका का सामूहिक प्रतिज्ञापन कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “अगर आप भी अपने बच्चों को लाठी–डंडे और हथियार या औजार की जगह क़िताब और कलम, जुबान पर हिन्दू मुसलमान की जगह “मेरी शान, भारत का संविधान” लाना चाहते हैं तो,
इस प्रबुद्ध भारत की संगत करें।








