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देशभर में चल रहे भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन के अंतर्गत क्लस्टर अधिवेशनों की कड़ी में राजस्थान के दौसा जिले में भी बीएस फोर अभियान के अंतर्गत बीते सताइस अगस्त, दो हजार तेईस को दोसा कलक्टर अधिवेशन का आयोजन किया गया, जो सफलतापूर्वक संपन्न रहा ।
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दिनांक सताइस अगस्त, दो हजार तेईस को डोरिया मैरिज गार्डन में दौसा कलस्टर अधिवेशन का आयोजन किया गया, जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ ।
इस कलक्टर अधिवेशन का उद्घाटन राजकीय महाविद्यालय अलवर के प्रोफेसर मूलनिवासी भरत मंजुल जी ने किया । जबकि उद्धघाटन सत्र की प्रस्तावना मूलनिवासी मन्ना राम बैरवा जी ने और संचालन मूलनिवासी रंग लाल मीणा जी ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर भरत मंजुल जी ने कहा कि, आज देश भर में जो संविधान को लेकर यह जनजागरण का कार्य बीएस फोर के माध्यम से हो रहा है, यह बहुत सराहनीय कदम है।
मूलनिवासी प्रोफेसर भरत मंजुल ने अपने विचार को साझा करते हुए कहा की, आज एक तरफ ब्राह्मणवादी मीडिया मूलनिवासियों यानी एससी, एसटी और ओबीसी के सही हक और मांगों को जातिवादी बता रही है, तो वहीं दूसरी ओर ब्राह्मणवादी लोगों की बातों को राष्ट्रवादी बताया जा रहा है ।
उन्होंने अपने भाषण में बताया की कैसे समय समय पर देश के उच्च संवैधानिक संस्थाओं द्वारा गैर संवैधानिक फैसले आते रहे है। उन्होंने मेघालय और केरल हाई कोर्ट के साथ साथ कई रिपोर्टों से संबंधित आंकड़े लोगो के सामने रखे।
मूलनिवासी सुदेश गौतम जी (एक्स एन डीआरडीओ) ने बताया कि, मूल निवासी समाज समस्याओं के धनी है और षडयंत्रों के धनी है। उन्होंने कहा की, सामाजिक आंदोलन व लोकतंत्र एक दूसरे के पूरक होते है।
उन्होंने कहा की, जब भी इस देश में लोकतंत्र की ऑक्सीजन कम होगी तो देश के मूलनिवासियों पर जुल्म बढ़ जाएगा ।
उन्होंने कहा की, उन्नीस सौ अड़तालिस में जिस तरीके से कार्ल मार्क्स द्वारा नारा दिया गया था की “मजदूरों एक हो जाओ” इस प्रकार से आज की स्थिति में हमे भी एक होना होगा और संवैधानिक हको को बचाना होगा।
उन्होंने कहा की, संवैधानिक अधिकार केवल मानव अधिकारी नहीं, बल्कि सत्ता व शक्ति के उद्गम स्रोत है ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मूल निवासी भूपेंद्र सिंह जी ने कहा कि, आज देशभर में जो विपरीत परिस्थितियां पैदा की जा रही है। जिस तरीके से ब्राह्मणवादी व्यवस्था लोकतंत्र को अपंग बनाने पर तुली हुई है । ऐसी परिस्थितियों में बुद्धिजीवी लोगों का दायित्व बनता है कि अपने परिवार को भी इन स्थितियों से अवगत करवाये और लोकतंत्र एवं संविधान के महत्व को जन-जन तक पहुंचाए ।
संविधान प्रबोधक मूलनिवासी मोहनलाल कालाखो ने कहा कि, देश में संविधान, आने वाली नस्ल और भविष्य खतरे में नहीं है बल्कि खतरे में आज का वर्तमान है । अगर हम आज वर्तमान में कुछ नहीं करते है तो ना तो हमारा कल होगा और ना ही हमारा भविष्य होगा।
मूल निवासी रामसि लाल मीना जी ने कहा कि, यूसीसी कानून और वन विधेयक जैसे बिल पास किया जा रहा हैं। आज आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन की विरासत को बलपूर्वक छीनने का एक षड्यंत्र किया जा रहा है । जिससे पूंजीपतियों के द्वारा सरकार आदिवासियों को उनके अपने जल, जंगल, जमीन से ही बाहर कर सके।
मूल निवासी साहिल खान मेवाती जी ने कहा, जिस तरीके से मेवात में आपसी भाईचारा खराब करने की कोशिश की जा रही है और ब्राह्मणवादी व्यवस्था अब पूंजीवाद के साथ और तेजी से आ रही है। इससे यह संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में स्थिति और भी बदतर हो जाएगी, अगर हमने अपने संविधान की रक्षा नहीं की तो।
मूलनिवासी संघ के प्रदेश प्रभारी डॉ. उदय सिंह जी ने कहा कि, जिस तरीके से आज संविधान प्रबोधकों ने और यहां के लोगों ने अपने-अपने वकतव्य साझा किया, उसे यह पता चलता है की, हमारे पुरखों की जो विरासत है, जो हमें संविधान के माध्यम से इस राष्ट्र को बचाने के लिए और इस देश को राष्ट्र बनाने के लिए जो जरूरी है , उसी विरासत को खत्म किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, एक तरीके से ब्राह्मणवादी व्यवस्था को लागू करने के लिए पूरे ब्राह्मणवादी लोग इकट्ठा हो गए हैं। अब हमें भी संवैधानिक अधिकारों को बचाने के लिए और उसे प्राप्त करने के लिए एकजुट होना होगा।







