सत्ता से सवाल पूछती जबानों पर राजद्रोह के ताले कब तक लगाओगे?

किस किसकी जबान पर ताला लगाओगे?
किस किस पर राजद्रोह या राष्ट्रद्रोह लगाओगे?
आख़िर कितनों को गोली मरोगे!
तुम्हारी बन्दूक की गोली, हमारी बोली की गोली के सामने कुछ भी नहीं। तुम एक मरोगे तो एक को लगेगी,
हम एक मारेंगे तो सारे बेइमानों को ढेर करदेंगे।
डालो जेल में, करो राजद्रोह के मुकदमें, हम नहीं डरेंगे।
हम बोलेंगे, जनता बोलेगी।
हम पूछेंगे, सारी जनता पूछेगी? बताओ देश को किसने बेचा? बताओ देश का गद्दार कौन है? बताओ राज गद्दी पे बैठकर देश को बेचना क्या राजद्रोह नहीं है?
पूछेंगे हम सब, जब मेरा नेता अपना वादा भूलकर सदन से सड़क तक चुप्पी साधेगा और मूंह चुराएगा।
फिर हम सब उन अपने देश के नेताओं का गिरेवान पकड़ेंगे। उन पुलिस वालों से भी पूछेंगे जो सरकार से रोज़ी – रोटी, कपड़ा और मकान मांगने वाले बेरोजगार, यूवा और जनता पर लाठी बरसाते हैं और नेताओं पर फूल।
फिर काहें का लोकतन्त्र, फिर काहें का गणतंत्र?
याद करो तुम मालिक नहीं हो, चंद दिनों के चौकीदार हो, सेवक हो।
कल कहते थे “न खाऊंगा न खाने दूंगा” 56 इंच का पेट ठोककर कहते थे “मैं देश नहीं बिकने दूंगा”
आज रोज़गार नहीं है।
आज देश तुमने अडानी, अंबानी को किस बेशर्मी से बेचा, किस बेशर्मी से तुमने चंद पूंजीपतियों को देश की तमाम संपत्ति का मालिक बना दिया।
अब उसी चौकीदार से मैं तो पूछूंगा।
मैं तो पूछूंगा मेरे देश की आबोहवा में किसने हिंदू- मुसलमान का ज़हर घोला?
किसने जुबानों पर ताले लगाए,
मैं बोलूंगा, उम्मीद है भारत का हर यूवा बोलेगा; देश और समाज के सच्चे रक्षक हरियाणा के जांबाज़ शिक्षक सुरेश द्रविड़ के ऊपर राजद्रोह लगाना जनतन्त्र की हत्या है।
और जनतंत्र की हत्या ही जनता की हत्या है।
ऐसे 135 करोड़ लोगों के हत्यारों को सबक सिखाने के लिए हर यूवा बोलेगा!
ऐसे निर्भीक जाबांज आदर्श टीचर की रक्षा के साथ खड़ा होकर हर नागरिक अब बोलेगा।
बोलेगा:
“तानाशाही नहीं चलेगी!
सुरेश द्रविड़ पर लगा राजद्रोह का मुक़दमा वापस लो!”

आप सबसे अपील,
समाज, देश और लोकतंत्र के सच्चे सिपाहियों की रक्षा के लिए हुंकार भरो!

ललित कुमार
(राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष)
मूलनिवासी विद्यार्थी संघ

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