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दिल्ली में स्थित दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल, तिहाड़ जेल में आवश्यक सुविधाओ का अभाव हैं। जिनमे पीने के पानी, शौचालय और उचित सफाई शामिल हैं। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा की, एक कैदी के बुनियादी संवैधानिक अधिकार सलाखों के पीछे भी बने रहते हैं।
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भारत के विभिन्न जेलों की स्थिति कितनी दयनीय हैं, यह हम जेलों में बंद कैदियों की संख्या से पता लगा सकते हैं। जो जेलों की क्षमता से कई अधिक हैं।
इसके अलावा जेलों में कैदियों को दी जाने वाली आवश्यक सुविधाओ की कमी भी जेलो की खराब व्यवस्था को उजागर करती हैं।
बताते चले की दिल्ली में स्थित करीब चार सौ एकड़ के क्षेत्र में बनी दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जेल, तिहाड़ जेल में आवश्यक सुविधाओ की कमी पाई गई हैं।
बीते दिनों दिल्ली हाई कोर्ट ने विभिन्न बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि, एक क़ैदी के संवैधानिक अधिकार जेल में भी बने रहते हैं।
कोर्ट ने जेल परिसर में सुविधाओं के निरीक्षण के लिए वकीलों की चार सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। जिसका काम वर्तमान स्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना और परिसर के भीतर पीने के पानी, स्वच्छता, हाइजीन और वॉशरूम/शौचालय के रखरखाव की स्थिति पर कोर्ट को अपडेट करना है।
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े जेल परिसर में बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी को इंगित करते हुए अदालत ने कहा कि, किसी व्यक्ति की कैद की स्थिति के बावजूद जीवन का अधिकार अनुल्लंघनीय है।
बताते चले की, याचिकाकर्ता ने अदालत का ध्यान एक पैनल वकील द्वारा किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट की ओर आकृष्ट किया था, जिसमें जेल में कैदियों को पीने की पानी की कमी का ज़िक्र था।
याचिका में वहां स्वच्छता की स्थिति को संतोषजनक स्तर से कम बताते हुए कहा था कि, कई वॉशरूम और शौचालय जर्जर स्थिति में हैं और यहां तक कि टूटे हुए दरवाजों के कारण कैदियों की बुनियादी निजता से भी समझौता किया जाता है, जिससे वे व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए नहीं रख सकते।
याचिका के बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर भी जेल की असंतोषजनक स्थिति को लेकर सवाल उठाया है । अदालत ने कहा कि , दिल्ली सरकार के एक प्रतिनिधि ने अप्रैल में सूचित किया था कि जेल परिसर में बुनियादी सुविधाओं में सुधार की पहल चल रही है।
लेकिन याचिकाकर्ता ने तस्वीरें प्रस्तुत करते हुए तर्क दिया कि, उनके पास कैदियों की ऐसी शिकायतों की भरमार है, जो स्वच्छ पेयजल और उचित स्वच्छता जैसी बुनियादी जरूरतों की सुविधाओं में कमी का दावा करते हैं।
कोर्ट ने दिल्ली जेल नियम, दो हजार अठारह के नियम संख्या चार सौ पच्चीस का हवाला देते हुए कहा की, प्रत्येक कैदी को हमेशा ताजे पीने के पानी तक निर्बाध पहुंच मिलनी चाहिए। ये नियम न केवल कैदियों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के महत्व पर जोर देते हैं, बल्कि एक अच्छी स्वच्छता प्रणाली और वॉशरूम सुविधाएं भी सुनिश्चित करता हैं।






