कुपोषित बच्चों के मामलों में महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात शीर्ष पर। कुपोषण से बच्चों का वजन एवं लंबाई पर गंभीर असर होता है।
कुपोषण से बौद्धिक क्षमता भी कम हो जाती है। सामान्य बच्चों के मुकाबले बीमार होने का खतरा नौ गुना बढ़ जाता है।
भारत मे प्रत्येक साल दस लाख कुपोषण के मामले सामने आते हैं। अरबों-खरबों का टैक्स और सरकारी योजनाओं का धन कहां जाता है?
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