जननायक धरती आबा बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर पुरे देश में विभिन्न जागृति कार्यक्रम आयोजित करते हुए समाज ने शान और सादगी से जयंती मनायी। मूलनिवासी सभ्यता संघ द्वारा दिन्नक 14 और 15 नवंबर को मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के पपौंध में दो दिवसीय उलगुलान महोत्सव का आयोजन किया गया।
इस दो दिवसीय उलगुलान महोत्सव में मूलनिवासी सभ्यता और कलाचार के विभिन्न कार्यक्रमों की प्रस्तुति हई। जिसमें, शैला नृत्य, राई नृत्य, मूलनिवासी जागृति गीत, कविता वाचन आदि की प्रस्तुति हुयी। मूलनिवासी विद्यार्थी संघ के कार्यकर्ताओं ने बिरसा मुंडा के जीवन प्रसंगो पर आधारित नृत्य कार्यक्रम का मंचन किया। उलगुलान महोत्सव में बड़ी संख्या में मूलनिवासी समाज के युवा विद्यार्थी महिलाओं ने सहभाग लिया।
इस दो दिवसीय उलगुलान महोत्सव का उद्घाटन बामसेफ प्रकाशन समिति के चेयरमैन मू धनंजय झाकर्डे द्वारा धरती आबा बिरसा मुंडा, राष्ट्र निर्माता डॉ बाबासाहेब अंबेडकर और गुरु संत रैदास जी की प्रतिमाओं को माल्यार्पण करके किया गया। इस वक्त समाज जागृति रैली का कार्यक्रम भी हुआ।
दो दिवसीय उलगुलान कार्यक्रम में उद्घाटक और मुख्य अतिथि के रूप में बामसेफ प्रकाशन समिति के चेयरमैन मू धनंजय झाकर्डे ने उपस्थितों को बड़े ही सरल रूप से मार्गदर्शन किया।
मूलनिवासी उलगुलान महोत्सव के उद्घाटक धनंजय झाकर्ड़े ने कहा कि “हमारी लड़ाई संस्कृति और सभ्यता के बीच है। सभ्यता मूलनिवासियों की है और संस्कृति ब्राह्मणों की है। हमें अपनी सभ्यता को स्थापित करना होगा। आज शासक जातियों ने हमारे महापुरुषों की जन्म जयंती मनाना शुरू कर दी है। बिरसा मुंडा की जयंती को जनजाति गौरव दिवस के रूप में शासक वर्ग के लोग मना रहे हैं यह हमारे महापुरुषों को एक समुदाय तक सीमित करने का षडयंत्र है। जननायक बिरसा मुंडा पूरे राष्ट्र के, मूलनिवासियों के महापुरुष हैं।
धनंजय झाकर्ड़े आगे कहा कि भारत के संविधान के कारण मूलनिवासी समाज में से जिन लोगों का भला हुआ है उनकी जिम्मेदारी है मूलनिवासी समाज को जागृत करना होगा। हमारा सबसे बड़ा दस्तावेज, सबसे बड़ी ताकत भारत का संविधान है। इसमें हमारे अधिकार हैं। इसलिए संविधान को पढ़ो। भारत के संविधान को मूलनिवासियों तक इसीलिए नहीं पहुंचने दिया गया, क्योंकि अगर हम जागृत हो जाते है, विकास कर लेते हैं, तो शासक जातियों की कुर्सी, सत्ता खतरे में आ जाती है।
इस वक्त विशिष्ट अतिथि के रूप में मू. रामचरण कुशवाहा उपस्थित थे। कार्यक्रम का अध्यक्ष स्थान मू भोलाप्रसाद सिंह, पूर्व बीईओ ने सुशोभित किया। कार्यक्रम में मू. के.पी बौद्धचार्य (बामसेफ कार्यकर्ता), मू. पवन कुमार साहू (जिला प्रशिक्षण सचिव, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, जिला सीधी), मू. मोहन पटेल (प्रबंधक खड्डा, मूलनिवासी चिंतक) मू. रामविशाल पाल जी ( पूर्व जिला पंचायत सदस्य) मू.जे.पी. पागरे जी (मूलनिवासी चिन्तक) मू. राममोल कोल (मूलनिवासी कार्यकर्ता) ने अपने विचार रखें। आभार प्रदर्शन मू.सुखदेव जायसवाल (प्रदेश उपाध्यक्ष पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक) ने किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मू. सुखदेव जयसवाल, मू.श्यामलाल कोल, मू.सुशील जायसवाल, मू.राकेश जयसवाल, मू. हेतराम प्रजापति, मू . दिनेश साकेत, मू .पंचम कोल, मू. श्याम साकेत, मू. सुखराम साकेत, मू.मानिक लाल जायसवाल, मू.बाबूलाल साकेत, मू,सुखसेन प्रजापति, मू. भागवत साहू, मू.सुदर्शन साहू, मू विश्राम कोल आदि मूलनिवासी कार्यकर्ताओं ने बढ़चढ़कर परिश्रम किए।
संवाददाता सुनील टांडिया का रिपोर्ट।








