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उत्तर प्रदेश की चरमराती हुई प्रशासन व्यवस्था की एक और लापरवाही सामने निकल कर आई हैं। जिसका शिकार एक पिता को होना पड़ा हैं। आरोप है की पंद्रह वर्षीय नाबालिग से हुए दुष्कर्म के मामले में पुलिस द्वारा की गई लापरवाही को देखते हुए पीड़िता के पिता ने खुदकुशी कर लि।
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आपने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कई मौकें पर यूपी पुलिस की वाहवाही करते देखे होंगे। लेकिन यूपी पुलिस की अच्छाई सिर्फ भाजपा नेताओं के भाषणों तक ही सीमित हैं। क्योंकि हकीकत में यूपी पुलिस की मानसिकता गरीब, लाचार और बेबस लोगो के शिकायतों से समाज के ताकतवर आरोपियों को बचाना हैं।
मामला उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एट थाना क्षेत्र से निकल कर आई हैं। जहा अपनी नाबालिग बेटी को न्याय दिलाते दिलाते एक पिता ने खुद पेड़ से लटककर अपनी जान दे दी।
आरोप है की मृतक पिता ने अपनी पंद्रह वर्षीय बेटी से सामूहिक दुष्कर्म की जांच में देरी के कारण कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
पीड़िता के परिवार और पड़ोसियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन पर व्यक्ति की शिकायत पर समय पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।
मिली जानकारी के मुताबिक पंद्रह वर्षीय नाबालिग के साथ दो लोगो ने दुष्कर्म करने की कोशिश की थी। लेकिन वह लड़की वहा से भागने में सफल रही। पीड़िता ने अपनी आपबीती अपने माता पिता को बताई। जिसके आधार पर पिता ने एट थाना में शिकायत दर्ज कराई।
लेकिन जांच में हुई देरी और पुलिस की लापरवाही से तंग आकर पिता ने खुदकुशी कर ली।
मिली जानकारी के मुताबिक जब शिकायत लेकर व्यक्ति और उसकी बेटी एट थाने पहुंचे, तो वहां के कर्मचारियों ने कथित तौर पर उन्हें मामले में फंसाने की धमकी दी थी। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि, अधिकारियों ने उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की और इसके बजाय उन्हें मामला वापस लेने के लिए मजबूर किया।
आज इन्ही सब कारणों के वजह से देश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। खास कर उत्तर प्रदेश में बेटियों की स्थिति बेहद चिंताजनक हैं। और ये पहली बार नहीं है जब यूपी पुलिस की लापरवाही सामने आई हैं। ऐसे कई मौकों पर पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगते रहे हैं।
उदाहरण के लिए हाथरस मामले में भी यूपी पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। जिसके बाद विश्व स्तर पर यूपी पुलिस की जमकर आलोचना हुई थी।







