कोरोना भयानक रूप में फैलने की वजहें।

Covid-19 Spreaders

पहले तो श्मशान घाटों पर लाशों की लंबी कतारें और अब गंगा नदी में लाशों को बिना अंत्येष्टि के ही बहा दिए जाने संबंधी खबरें।

अख़बारों और टीवी के आंकड़ों को देख लग रहा है कि देश में कोरोना वायरस संक्रमितों के मामले में घट हो रही हैं। इसे देखकर लोग तसल्ली कर लें। लेकिन उत्तराखंड के लोगों के लिए अभी भी खतरा मंडरा रहा है।

उत्तराखंड में कोरोना के आंकड़े डराने वाले हैं। पिछले दस दिनों में 9 साल से कम उम्र के लगभग 1,000 बच्चे कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए हैं। बच्चों को इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। वहीं गांवों में वायरस तेजी से फैल रहा है और मौतें भी हो रही हैं।

जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में प्रति एक लाख लोगों पर 771 ऐक्टिव केस हैं उत्तराखंड में 79,379 कोरोना वायरस के ऐक्टिव मामले हैं और 4,426 लोगों की मौत हो चुकी है।

सवाल यह है कि उत्तरखंड में बढते इस संक्रमण के कारण क्या है? क्या इस परिस्थिति के लिए हरिद्वार में संपन्न हुआ कुंभ मेला बड़ा कारण है? 

यह  सही हैं ,की  उत्तराखंड के हरिद्वार में हुये कुंभ मेले में जुटी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ कोरोना को भयानक रूप से व्यापक स्तर पर बढोत्तरी करनेवाली साबित हुई है। इस बात पर सभी ने गौर किया है की कुम्भमेला में आये लाखों लोगों ने न केवल कोरोना वायरस यहां लाया बल्कि अपने अपने राज्यों जिलों में भी उसे लेकर गए। वे सुपर स्प्रेडर के रूप में सामने आये। दिल्ली समेत कई राज्यों ने कुम्भमेला से आये इन लोगों पर हाई अलर्ट जैसे चिंता व्यक्त की थी।

 सवाल है कि आखिर यह हालात क्यों हुए? 

इस का जवाब यह हो सकता है कि उत्तराखंड सरकार ने न केवल इस महामारी में कुंभ के दौरान लाखों लोगों की भारी भीड़ एकत्रित होने दी बल्कि यह कहकर अंधविश्वास को बढाया कि कुंभ में मां गंगा की अविरल धारा और आशीर्वाद से कोरोना नहीं फैलेगा।

इतना ही नहीं, बल्कि उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि कुंभ में आनेवालों को आरटीपीसीआर की नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाने की भी जरुरत नहीं है।

इस अंधविश्वास और बडबोलापन से कोरोना ने अपने पंजे फैला दिये और एक ही अखाड़े में कई लोग बेमौत मारे गए। हजारों अन्य संक्रमित पाए गये और जो लोग कुंभ से देश भर में जहां जहां भी लौटे, उन्होंने वहां कोविड को फैला दिया और हालात बेकाबू हो गए।

यह आम मान्यता है कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को घातक मानती है और अवैज्ञानिक विचार तथा अंधविश्वास को अमृत मानती है। यही कारण है कि इस दल के नेता खुद ही अवैज्ञानिक बातों का प्रचार-प्रसार करते हैं और उन बातों को मानते भी हैं। गोबर, गोमूत्र, होम और मंत्रों का प्रयोग करते करते यह हालत हो गई है कि लोग सांस-सांस को तरस रहे हैं। लेकिन उन्हे न तो लोक-लाज का भय है और ना ही जवाबदेही का अहसास। 

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण पहाड़ के गांवों तक पहुंचने से पूरे राज्य में चिंताएं बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, परमर्श, उपचार, दवाइयां, अस्पताल, ऑक्सीजन, वैक्सीन आदि कि कमी सभी जगह देखी जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार राज्यों को दोष दे रही है और राज्य केंद्र सरकार पर।

टीकाकरण की प्रक्रिया बहुत धीमी है क्योंकि सरकार के पास अभी वैक्सीन ही नहीं है। वैक्सीन आने में और उसे लगाए जाने में अभी कुछ महीने लगनेवाले है। वैक्सीन को लेकर काफी सम्भ्रम है। आमिर लोग प्राइवेट अस्पतालों से वैक्सीन खरीदकर अपना बचाव कर लेंगे लेकिन सामान्य जनता कहां जायेगी? यह सबसे बड़ा सवाल है। इलेक्शन में हर मुहल्ले में पोलिंग बूथ खड़ा करके घर घर तक वोट का हिसाब रखने वाले सभी राजनैतिक दल अब चुप है। क्या टेस्टिंग, परामर्श, जरुरी दवाई और अनाज घर तक नहीं पहुंचाया जा सकता?

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