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देश भर के विभिन्न जिलों में बीएस फोर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जनजागरण अभियान के तहत संविधान विचार गोष्ठी और क्लस्टर अधिवेशन लगाए जा रहे हैं। जिसमे समाज को संविधान के प्रति जागरूक करने के साथ साथ, फुले – आंबेडकरी विचारधारा से भी परिचित कराया जा रहा है ।
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फुले-आंबेडकरी विचारधारा के संगठनों द्वारा देश भर में बीएस फोर यानी भारतीय संविधान, सम्मान, सुरक्षा, संवर्धन राष्ट्रव्यापी महा जन जागरण के तहत क्लस्टर अधिवेशन लगाए जा रहे हैं।
हाल ही में डेढ़ सौ से अधिक क्लस्टर अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। जिसमे बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के जिले शामिल हैं।
इस अभियान के तहत संविधान जन चेतना रैली भी निकाली जा रही हैं। जिसमे महिलाओं, पुरुषो और युवा बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं।
देश भर में आयोजित होने वाले क्लस्टर अधिवेशन और संविधान विचार गोष्ठी कार्यक्रम बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स जैसे मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ और मूलनिवासी सभ्यता संघ जैसे संगठनों के साथ और सहयोग से किए जा रहे हैं।
बीएस फोर के तहत आयोजित इन कार्यक्रमों में बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स संगठनों के अलावा कई अन्य मूलनिवासी बहुजन संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। साथ ही बीएस फोर अभियान के तहत आयोजित होने वाली इन कार्यक्रमों की तारीफ कर रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में मूलनिवासी बहुजन समाज के बुद्धिजियों को भी उद्घाटक, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और वक्ता के रूप में आमंत्रित किए जा रहे हैं। जो इन कार्यक्रमों में उपस्थित होकर अपने विचार रखते हुए बीएस फोर अभियान की सराहना कर रहे हैं।
बताते चले की बीएस फोर अभियान की शुरुआत बामसेफ संगठन ने साल दो हजार अठारह में किया था।
आज बामसेफ और इसके ऑफ शूट विंग्स जैसे मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ और मूलनिवासी सभ्यता संघ जैसे संगठनों ने इसे पूरे भारत में फैला दिया हैं।
आज हजारों की संख्या में संविधान प्रबोधक गांव – गांव, घर – घर जाकर मूलनिवासी बहुजन समाज के बीच संविधान को बिल्कुल ही आसान और सरल भाषा में बता रहे हैं।
आज ऐसे हजारों लोग है जो बीएस फोर अभियान के कारण ही वे संविधान में दिए अपने मौलिक अधिकारों से परिचित हो पाए हैं और संविधान को जान पाए हैं।








