डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर महापरिनिर्वाण दिवस को उनके आंदोलन के प्रति “निश्चय और प्रतिबद्धता दिवस” के रूप में याद करते हुए रविवार 6 दिसम्बर को बामसेफ़ और मूलनिवासी संघ ने देश और विदेश में उन्हें विनम्र अभिवादन किया।
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने न्याय स्वतंत्रता समता और बंधुता के तत्त्व को स्थापित करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन न्यौछावर किया। इस देश के तमाम दबे कुचले लोग, किसान मजदूर, बेरोजगार, महिला, बूढ़े बच्चे सभी के अधिकार और सुरक्षा की व्यवस्था भारत के संविधान में की। उनके पार्टी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए देश-विदेश से फूले-अम्बेडकरी अनुयायियों ने उन्हें भाव सुमन अर्पित किए।
बाबासाहेब का महापरिनिर्वाण 6 दिसम्बर 1956 को दिल्ली में हुआ था। अंतिम दर्शन के लिए बाबासाहेब का पार्थिव मुंबई के चैत्यभूमि में लाया गया था। तब लाखों की तादाद में मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग मुंबई पहुँचे थे। उस के बाद हर साल अंबेडकरी अनुयायी 6 दिसम्बर को मुंबई आते है। लेकिन कोरोना के चलते इस साल लोगों ने अपने ही शहरों और गावों में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर उन्हें अभिवादन किया।








