======
आज कल हर किसी का काम बाबा साहेब का नाम लिए बगैर नहीं चलता हैं। हर कोई जय भीम कह कर अपना काम निकाल लेता हैं। जिस तरह बाबा साहेब की जयंती पर हर साल चौदह अप्रैल के दिन लोग नीला गमछा बांध कर निकलते हैं। लेकिन वही लोग साल के तीन सौ चौसठ दिन ढूंढने पर भी नहीं मिलते।
=======
आपको हाल ही में बीती चौदह अप्रैल बाबा साहेब की एक सौ बत्तीसवीं जयंती याद होगी। सैकड़ों जगहों में बाबा साहेब की जयंती मनाई गई। लेकिन आज उनमें से गिने चुने लोग ही बाबा साहेब के विचारों पर चलते हुए नज़र आयेंगे।
हर साल चौदह अप्रैल यानी बाबा साहेब के जयंती पर रैली व सभा का आयोजन किया जाता हैं। जिसमे खूब नारे लगते हैं की “बाबा तेरा मिशन अधूरा, हम सब मिलकर करेंगे पूरा” लेकिन सवाल आता है की क्या साल में एक दिन अंबेडकरवादी बन कर बाबा साहेब के मिशन को पूरा किया जा सकता हैं?
क्या साल में एक दिन बाबा साहेब के अनुआयी बनने वाले लोगो को पता हैं की बाबा साहेब का वो अधूरा मिशन हैं क्या? क्या वे मूलनिवासी महापुरुषों के विचारधारा से परिचित हैं? शायद नहीं? क्योंकि अगर वे फुले – अम्बेडकरी विचारधारा से परिचित होते तो वे केवल चौदह अप्रैल के दिन ही नहीं बल्कि साल के तीन सौ पैंसठ दिन सामाजिक कार्य में जुड़े हुए नज़र आते। क्योंकि तब उन्हे वाकई पता होता की बाबा साहेब के अधूरे मिशन को पूरा करना इतना भी आसान नहीं जितना आसानी से वे साल में एक दिन नारे लगा कर निकल जाते हैं।
लेकिन अच्छी बात यह है की हमारे समाज में ऐसे भी लोग हैं जो सिर्फ नारे ही नहीं लगाते बल्कि बाबा साहेब के मिशन को पूरा करने का जिम्मा अपने कंधे पर उठाए हुए हैं। और इन लोगो को यह भी पता है की यह काम व्यक्तिगत रूप से करना असंभव हैं इस काम के लिए किसी राष्ट्रस्तरीय संगठन से जुड़ना होगा और वे संगठन से जुड़ कर काम करते है। और ये लोग सिर्फ चौदह अप्रैल के दिन ही नहीं बल्कि साल के तीन सौ पैंसठ दिन आपको किसी न किसी प्रशिक्षण शिविर में किसी गांव में, किसी मैदान में या किसी पेड़ के छांव के नीचे सामाजिक कार्य करते यानी लोगों को मूलनिवासी विचारधारा से जोड़ते हुए नज़र आ जायेंगे।
ये वही संगठनों के लोग है जिनके हाथों में अक्सर देश के संविधान के साथ साथ बी एस फॉर का बैनर नजर आता हैं। वे लोग बामसेफ, मूलनिवासी संघ, मूलनिवासी विद्यार्थी संघ, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ और मूलनिवासी सभ्यता संघ जैसे संगठनों के लोग होते है। जिनके पदाधिकारी भी एक कार्यकर्ता के रूप में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते नजर आते हैं।
इन संगठनों के लोग देश भर में जगह जगह पर निरंतर बैठकों व प्रशिक्षण शिविर का आयोजन करते हैं । जहा वे सैकड़ों लोगो के बीच मूलनिवासी विचारधारा और संविधान के बारे में जागृति फैलाते हैं।
उदाहरण के लिए बीते पच्चीस अप्रैल दो हजार तेईस को उत्तर प्रदेश के जौनपुर के ग्राम सभा मीरापुर ब्लॉक खुटहन में एक बैठक सतत प्रक्रिया के तहत किया गया। जिसकी अध्यक्षता मूलनिवासी संघ के सदस्य मू० विनय कुमार और संचालन मूलनिवासी विद्यार्थी संघ से मूलनिवासी विकास कुमार द्वारा किया गया।
जबकि संगठनात्मक विचार देने का काम प्रदेश महासचिव मूलनिवासी संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के मू० उमेश चंद गौतम, मूलनिवासी संघ के जिला प्रशिक्षण सचिव मू० सुरेश कुमार बौद्ध, मूलनिवासी सभ्यता संघ के जिला अध्यक्ष मू० धुरूप राज जी द्वारा किया।








