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भारत में गरीबी की दशा क्या है? इससे पूरी दुनिया परिचित हैं। लेकिन फिलहाल खबर बिहार की है, जहा रहने वाले एक तिहाई से अधिक परिवार मात्र छह हजार रुपये या उससे कम की मासिक आय में गुजारा कर रहे हैं। इनमे से अधिकतर परिवार मूलनिवासी परिवार हैं।
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हाल ही में विधानसभा में पेश की गई जाति सर्वेक्षण की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार की एक तिहाई से अधिक परिवार केवल छह हजार रुपए या उससे कम की मासिक आय में अपना जीवन गुजारा कर रहे हैं।
छह हजार मासिक आय यानी रोजाना मात्र दो सौ रुपए में बिहार के लाखो परिवार अपना खर्चा चला रहे हैं।
अगर एक परिवार में औसतन छह सदस्य ही माने तो प्रत्येक सदस्य पर एक दिन में मात्र तेतीस रूपये खर्चा होता हैं।
अब समझने वाली बात है की क्या मात्र दो सौ रुपए में बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं?
देश की वर्तमान महंगाई में मात्र दो सौ रुपए प्रतिदिन में एक परिवार का खर्च कैसे चल सकता हैं ? इसका अंदाजा हम लगा ही सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है की मात्र छह हजार रुपए या उससे कम की मासिक आय में अपनी जीविका चलाने वाले बिहार की इस एक तिहाई परिवारों में पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों का प्रतिशत अधिक हैं।
हाल ही में संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग दो करोड़ संतानवे लाख (2.97 करोड़) परिवार रहते हैं।
जिनमें से चौरांवे लाख (94 लाख) से अधिक यानी लगभग चौतीस प्रतिशत (34.13 प्रतिशत) परिवार गरीब हैं।
जिनमे पचास लाख से अधिक बिहारवासी आजीविका या बेहतर शिक्षा के अवसरों की तलाश में राज्य से बाहर रह रहे हैं।
वही दूसरे राज्यों में जीविकोपार्जन करने वालों की संख्या लगभग छियालिस लाख है, जबकि अन्य दो लाख सत्रह हजार (2.17 लाख) लोग विदेश चले गए हैं।








