सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष का पहले बयान, बाद में माफ़ी, फिर इस्तीफा। सिरीलंका में अडानी पर उठे सवाल।
बयान
सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने शुक्रवार को अपने देश सिरीलंका की एक संसदीय समिति के सामने कहा था कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने उन्हे यह कहा था की अदानी ग्रुप को बिजली परियोजना देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उनपर दबाव है।
बयान वापस व माफी
इस बयान को लेकर काफी विवाद निर्माण हुआ। सिरिलंका के राष्ट्रपति ने इस बयान को खुले आम खारिज किया। साथ ही सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने अपने बयान को वापस लिया और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहकर’ ऐसा कह दिया था।
सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष का इस्तीफा
इसके बाद खबर आई की एमएमसी फर्डिनेंडो ने श्रीलंका के बिजली प्राधिकरण के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया। श्रीलंका के बिजली और ऊर्जा मंत्री कंचना विजयशेखर ने उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की बात को ट्विटर के माध्यम से सार्वजनिक किया और कहा इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के वाइस चेयरमैन अब चेयरमैन बनेंगे।
आपको बता दें कि एमएमसी फर्डिनेंडो कथित बयान पर अदानी ग्रुप की ओर से भी आपत्ति जताते हुए निराशा व्यक्त की है।
अडानी समूह श्रीलंका में मौजूदगी
गौरतलब है कि, श्रीलंका लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट में है। संकट इस घड़ी में भारत ने श्रीलंका को मदद की है।
आपको यह भी बता दें, बीते कुछ वर्षों में अडानी समूह श्रीलंका में अपनी उपस्थिति को बढ़ा रहा है। बीते वर्ष ही अडानी समूह ने कोलंबो बंदरगाह के पश्चिमी कंटेनर टर्मिनल को विकसित करने का कांट्रैक्ट 51% हिस्सेदारी के साथ हासिल किया था। इस वर्ष इस अडानी ग्रीन एनर्जी ने दो रिन्यूवेबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स, एक मन्नार और दूसरा पूनेरिन में हासिल किया है।
हाल ही में सिरिलंका के संसद ने कड़े विरोध के बावजूद बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा बोली लगाने के नियम को हटाने के लिए देश के इलेक्ट्रिसिटी कानून में संशोधन किया। जिसपर अडानी ग्रुप का नाम लेकर सिरी लंका संसद के विपक्ष ने जमकर हमला बोला।







