शुक्रवार 10 जून 2022 के दोपहर के करीब 2 बजे के बाद की बात है। राहुल नाम के बच्चे को उसके घर के लोग खोज रहे थे। घरवालों ने अपनी बाडी (घर के पीछे के खेत) की तरफ जाके खोजा तो कहीं से रोने की आवाज आ रही थी। आवाज बोरवेल के पास जमीन के अंदर से आ रही थी। बोरवेल के गड्ढे के पास जाकर देखा तो पता चला की राहुल बोरवेल में गिर गया है। तुरंत 102 पर फोन कर मदद मांगी गयी।
रेस्क्यू टीम ने पूरी कोशिश की। रेस्क्यू टीम की कोशिश को राहूल ने भी उतना ही साथ दिया। 5 दिन लगातार करीब 105 घंटे अथक प्रयासों के बाद राहूल को सकुशल बाहर निकाला गया। राहुल को बिलासपुर में अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया, उसकी सेहत अब ठीक है। बिलासपुर रेंज के आई जी आर एल दांगी ने बालक राहूल साहू के स्वस्थ होने की जानकारी अपने फेसबूक एकाउंट पर दी है। दांगी लिखते हैं “बहादुर राहुल स्वस्थ है, डॉक्टर के अनुसार अभी स्थिति नोर्मल है। सुबह नाश्ता भी किया है।”

माना जा रहा है कि यह इस प्रकार का देश सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में 65 फुट गहरे बोरवेल में गिरे 11 वर्षीय राहुल पर पूरी तरह सटीक बैठती है, जो 105 घंटे तक बोरवेल के गड्ढे में फंसा रहा और राहत व बचाव दल ने मौत को मात देकर उसे सुरक्षित निकालने में कामयाबी पाई। इसे देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य के जांजगीर-चांपा निवासी राहूल 11 वर्ष का बालक है। जानकारी के मुताबिक वह मानसिक तौर पर कुछ कमजोर भी है। लेकिन बच्चे के हौसले की दाद देनी होगी। बोरवेल में नीचे करीब 65 फिट फँसने के बाद भी उसने रेस्क्यू टीम को पूरा प्रतिसाद दिया।
राहुल के पिता लाला साहू ने कहा, ‘‘मेरा बेटा मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर है लेकिन वह वो सब करता है जो एक सामान्य बच्चा करता है। वह साइकिल चलाता है, तैरता है, खेलता है।”
कैसे निकाला राहूल को बाहर?
बोरवेल में करीब 65 फिट नीचे राहुल फंस गया था। उसे बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम के सामने कई तरह की चुनौतियाँ थी। टीम ने एक सुनियोजित रणनीति बनाई। इसमें बालक से बातचीत करना, उसे ऑक्सीजन की व्यवस्था करना, उसे खाद्य सामग्री देना, कैमरे से बालक की स्थिति जांचना, इन बातों के साथ बच्चे तक पहुँचने के लिए समानांतर सुरंग बनाई गई और बालक को सुस्थित बाहर निकाला गया।
NDRF/ SDRF/ SECL/ Army प्रशासनिक अधिकारी व कर्मी, स्थानीय पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी, बिजली कर्मी, वाहन चालक, समाजसेवी, इंजीनियर आदि 500 से अधिक लोग शुक्रवार से इस गंभीर बचाव अभियान में जुड़े रहें। खासकरके एनडीआरएफ एसडीआरएफ के प्रशिक्षित एवं अनुभवी टीम द्वारा रेस्क्यू के काम को सफलता से अंजाम दिया गया। डॉक्टरों द्वारा बालक राहूल को बोरवेल में ऑक्सीजन, पानी एवं खाने के लिए भी दिया गया। इंजीनियर कैमेर से लगातार राहूल से संपर्क में रहें।


बोरवेल में पानी ऊपर न चढ़ें इसलिए अन्य बोरवेल से पानी को लगातार बाहर निकाला जा रहा था। इस बोरवेल में ऊपर से केसिंग भी नहीं थी इसलिए ऊपर से मिट्टी नीचे गिरने का डर था। बड़े-बड़े पोकलेन से समानांतर गड्डा कर सुरंग बनाई गई। बोरवेल से सुरंग बनाते व्यक्त बीच में चट्टान लगी उसे तोड़ने के लिए बड़ी ड्रिल का उपयोग करना पड़ा।

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री ने पूरे रेस्क्यू ओपेरेशन की निगरानी की। अस्पताल में बच्चे राहूल व परिजनों से भेट की।
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याद आई 13 वर्ष पूर्व की घटना
इस घटना ने वर्ष 2006 के 13 साल पहले के चार वर्ष के प्रिंस की याद जगाई। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के गांव हलदहेड़ी में प्रिंस नामक चार वर्ष का बच्चा बोरवेल में गिर गया था। जिसे बाहर निकालने के लिए करीब 50 घंटों का रेस्क्यू ओपेरेशन चला। 21 जुलाई 2006 के दिन प्रिंस 60 फ़ीट गहरे गढ्ढे में गिर गया था।
लापरवाही इतनी है कि कभी कभी लगता है बोरवेल में बच्चों का गिरना आम बात है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के हामीरपुर में 3 वर्ष का बच्चा बोरवेल में 10 फिट नीचे गिरकर फंसा था। उसे बचाया गया।
बीते मई में पंजाब के होशियारपुर में एक 6 वर्ष का बच्चा 100 फिट गहरे बोरवेल में गिर गया था। रेस्क्यू टीम ने अपनी पूरी कोशिश की। लेकिन मासूम बच्चे को बचा नहीं पाए।
फरवरी 2022 को राजस्थान के सीकर जिले की दातारामगढ़ तहसील में रणवास गांव में चार साल का गुड्डू नाम का बच्चा इसी प्रकार से 57 फीट गहरे बोरवेल में फस गया था। 26 घंटों का रेस्क्यू ओपेरेशन चला।
इसी फरवरी 2022 को मध्यप्रदेश के दमोह जिले के पटेरा गांव में बोरवेल में गिरे 3 साल का बच्चा प्रिंस गिर गया। करीब 6 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रिंस को बोरवेल से बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल में पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रिंस का 15 दिन बाद ही जन्मदिन था.
दो माह पहले अप्रैल में इसी प्रकार से बिहार के पटना शहर में बोरवेल में 2 वर्ष का बच्चा बोरवेल में गिर गया। लेकिन वह बच नहीं पाया।
क्यों होती है यह घटनाएं?
लापरवाई यह इसके पीछे का प्रमुख कारण है। पानी के लिए खोदे गए बोरवेल को खुला छोड़ना अपने आप में बड़ी लापरवाई है। खुले मुंह वाले बोरवेल, सीवर लाइन, सेप्टिक टैंक आदि को लापरवाई से लोग खुला छोड़ देते हैं। जिसके कारण इस प्रकार से हादसे होते हैं।








बहुत बढ़िया
अच्छी खबरों के लिए शुक्रिया.