देश में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर विश्व स्तर पर भारत की निंदा।

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बीते दिनों अमेरिका ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में मानवाधिकार के हालात की निंदा की हैं। रिपोर्ट में मनमानी गिरफ़्तारियों, यूएपीए के इस्तेमाल और बुलडोज़र न्याय समेत देश के मूलनिवासियों अर्थात एससी, एसटी ओबीस और महिलाओं के साथ हो रही लगातार भेदभाव जैसी विभिन्न घटनाओं का ज़िक्र करते हुए देश में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त किया गया हैं।

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इस देश में सरकार द्वारा किये गए ऐसी कई अमानवीय घटनाएं हैं जिससे सरकार पर सवाल खड़े होते रहे हैं। जैसे कई लोगो पर मनमाने ढंग से राष्ट्रद्रोह का मामला लगा देना या सीबीआई या ईडी जैसी संस्थानों का गलत तरीके से इस्तेमाल करना आदि ।

इसी संबंध में एक बार फिर अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत की निंदा हुई हैं। बीते दिनों अमेरिका ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारत में मानवाधिकार के हालात की निंदा की हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की दो हजार बाईस में भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर जारी एक वार्षिक रिपोर्ट में मनमानी गिरफ़्तारियों, यूएपीए के इस्तेमाल, बुलडोज़र न्याय समेत देश की महिलाओं , अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति, पिछडो और धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष कर मुश्लिमों के साथ लगातार हो रहे भेदभाव जैसी विभिन्न घटनाओं का ज़िक्र किया हैं।

रिपोर्ट में इन विभिन्न घटनाओं का जिक्र करते हुए देश में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त किया हैं । साथ ही रिपोर्ट ने पिछले साल ऑक्सफैम इंडिया, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, केयर इंडिया और इंडिपेंडेंट एंड पब्लिक-स्पिरिटेड मीडिया फाउंडेशन पर आयकर सर्वेक्षणों का उल्लेख भी किया हैं।

रिपोर्ट का दावा है कि केंद्र सरकार कभी-कभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को हिरासत में लेने के लिए यूएपीए का इस्तेमाल करती है। रिपोर्ट में कई मामलों का विशेष तौर पर जिक्र किया गया है । जिसमे सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिए एक भाषण के चलते उमर खालिद की गिरफ्तारी समेत भीमा कोरेगांव विरोध प्रदर्शन से संबंधित साजिश के आरोपों में कैद सौलह कार्यकर्ताओं में से अधिकांश को जमानत से इनकार करने संबंधी मामले शामिल हैं।

रिपोर्ट ने आरोप लगाया है कि, सरकार ने लोगों को उनके निवास स्थान से बेदखल कर दिया, उनकी संपत्ति को जब्त कर लिया या उचित प्रक्रिया या पर्याप्त क्षतिपूर्ति के बिना घरों पर बुलडोज़र चला दिया गया।

बताते चलें की बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही सरकारें राष्ट्रद्रोह का गलत इस्तेमाल करती पाई गई हैं। बीते दिनों हरियाणा सरकार की चिराग योजना, ट्रांसफर पॉलिसी एवम नई शिक्षा नीति के विरोध करने पर शिक्षक मू० सुरेश द्रविड़ को पहले निलंबित करवाया गया और बाद में तेईस सितंबर, दो हजार बाईस को शिक्षकों की आवाज को एवम शिक्षा के मुद्दों को दबाने के लिए राज्य मंत्री कमलेश ढांडा के निर्देश पर एक सौ चौबीस (ए) राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया।

अमेरिका के इस रिपोर्ट में भी देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए गए है। रिपोर्ट कहती है कि, सरकार या सरकार के करीबी माने जाने वाले लोगों ने कथित तौर पर सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया आउटलेट्स पर दबाव डाला या परेशान किया हैं, जिसमें ऑनलाइन ट्रोलिंग भी शामिल है।

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