प्रभावी मिशनरी संगठन बनाना हो तो भिक्खु संघ का तंत्र समझना अनिवार्य : एस एस धम्मी

प्रभावी मिशनरी संगठन बनाना हो तो भिक्खु संघ का तंत्र समझना अनिवार्य : एस एस धम्मी

सोमवार 23 मई 2021 से एमएनटी न्यूज नेटवर्क पर तथागत बुध्द विचार महाउत्सव मनाया  जा रहा है। यह विचार महाउत्सव 30 मई तक मनाया जाएगा। तथागत बुद्ध के विचारों और बुद्ध इतिहास को समझने हेतु विभिन्न विषयों पर चर्चा आयोजित की जा रही है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 26  मई 2021 को रात्रि 8.30 बजे आयोजित चर्चासत्र में “विश्व के प्रथम मिशनरी प्रचारक तंत्र भिक्खु संघ का निर्माण – ब्राह्मणवाद के विरुद्ध क्रांति का आंदोलन” इस विषय पर लाइव चर्चा हुई। जिसमें दर्शकों के सवालों के भी जवाब दिए गए। इस विषय पर मू डॉ विजय कुमार त्रिशरण (सामाजिक चिंतक व लेखक, झारखंड और मू एस एस धम्मी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ) पैनेलिस्ट के रूप में उपस्थित थें। इस चर्चा में मू एस एस धम्मी इन्होने रखे विचारों का संक्षिप्त शब्दांकन। 

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मू एस एस धम्मी –
दुःख मुक्ति का सम्बोधि ज्ञान प्राप्ति के उपरांत तथागत बुद्ध के मन मे ‘इस ज्ञान को लोगों में बताया जाए या नहीं? बताने के बाद समाज की प्रतिक्रिया क्या होगी? कोई सुनेगा या नही? कोई इसे स्वीकार करेगा या नही?’ ऐसे कई सवाल उभरें। काफी सोचने के बाद उन्होंने अपने ज्ञान को समाज में ले जाने का निर्णय लिया। तब दूसरा सवाल मन में उभरा की, सर्वप्रथम किसे बताया जाए?

जब कोई नया विचार किसी को बताना होता है तब हमें वह लोग याद आते है जो हमे जानते है, पहचानते है, समझते है और सुनते है। बुध्द को भी उन पंचवर्गीय भिक्खुओं की याद आयी जिनके साथ उन्होने एक लंबा समय व्यतीत किया था। वे उनको करीब से जानते थे और उन्होंने बुध्द के लिए बहुत कुछ किया भी था। लेकीन जब बुध्द उन्हे मिलने गये तब उनके मन में बुद्ध के विरुद्ध क्रोध था और वे बुध्द का सम्मान भी नही करना चाहते थे। किंतु जैसे ही बुध्द उनके निकट पहुँचे तो अपने आप उन्होने बुध्द का सम्मान के साथ स्वागत किया और उन्हे आसन भी दिया और बुध्द का ज्ञान भी सुना तथा ज्ञान का प्रचार करने के लिए भी तैयार हुए। यहाँ देखने लायक एक महत्वपूर्ण बात है की बुध्द ने उन्हे बडे विस्तार से समझाया है। यह विस्तार पूर्ण ज्ञान एक ही दिन में समझाना संभव नही है। अतः एक से जादा दिन लगे होगे। लेकिन कितने दिन लगे होंगे इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नही है।

अपने विचारों के साथ लोगों को जोड़ने की जो सामान्य प्रक्रिया है, जिसमे मिलना-जुलना एवं हलचल पूछने जैसी अनौपचारिक विधियाँ शामिल है उन सभी उपचारों का बुद्ध ने भी उपयोग प्रयोग किया है। इसके उपरांत भी उन्हे सीधे प्रचारक नहीं बनाया गया है।

तथागत बुध्द के परिचय के या जो स्थापित ज्ञानी लोग थे जिनके प्रभाव में सैकड़ों अनुयायी रहा करते थे उन्हें अपना ज्ञान समझाने के लिए शुरु शुरु में बुद्ध स्वयं जाने लगे। तथा समझाने की पद्धति का साक्षात्कार एवं प्रशिक्षण भी अपने साथी को देने लगे। फिर एक निर्णायक मोड़ पर बुद्ध ने संघ का निर्माण किया। संगठित हुए प्रचारक भिक्खुओं के लिए संघ को नियमबद्ध भी किया जिससे संघ की गतिविधियां सुचारू ढंग से चले। बुद्ध ने घोषित किया कि व्यक्ति ही मेरे विचार का केंद्र बिंदु है। तथा एक व्यक्ति की  दूसरे व्यक्ति से वर्तन व्यवहार की प्रणाली निश्चित करना मेरा कार्य है।

बुद्ध के समय गैरबराबरी की भावना थी। गैरबराबरी की भावना – जिसे बाबासाहेब आंबेडकर ब्राह्मणवाद कहते है का समाज पर गहरा प्रभाव था। वर्ण व्यवस्था के नियमानुसार समाज का वर्तन व्यवहार था। बुध्द के प्रचारक भिक्खु संघ के सुनियोजित सूत्रपात के कारण यह परिणाम निकला की, समाज में नयी सोच गतिमान होने लगी। लोग नयी सोच की प्रक्रिया में अग्रसर होने लगे। स्थापित मान्यताएं ध्वस्त होने लगी। वैदिक वर्ण व्यवस्था जो समाज मन पर हावी थी उसका प्रभाव घटने लगा। समाज के वर्तन-व्यवहार में क्रांतिकारी परिवर्तन आने लगा। भिक्खुओं के साथ साथ भिक्खुनी संघ भी बना। उपासक के साथ साथ उपासिका संघ भी बनने लगे। यज्ञ के विरोध में समाज में खास कर किसानों मे तेजी से सोच बढने लगी। राजा महाराजाओं व्यापारियों की सोच भी बदलने लगी।

इस तरह तेजी से हो रहे बदलाव क्रांति में परिवर्तित हुए। सोच में बदलाव लाने की सामान्य प्रक्रिया परिवर्तन होती है और तेजी से गतिमान होने वाले बदलाव क्रांति कहलाते है। बुद्ध से पूर्व जो विचार या दर्शन थे वह व्यक्तिगत  तप साधना से बनाये मापदंड या मानक से प्रेरित धर्म थे। अनुशासित प्रचारको का संगठित रुप से एक विचार को लेकर चलनेवाला भिक्खुओं का यह पहला संगठ़न तंत्र था। वह सही मायने में यह संघ एक क्रांतिकारी मिशनरी तंत्र था। वह अपने आप में क्रांति ही थी। जिसने स्थापित मान्यताओं को नकारते हुए अपनी समानता पर आधारित नयी मान्यताएं स्थापित की।” 

इसी चर्चा के दौरान दर्शकों द्वारा पूछे गए सवालों के विस्तार से जवाब भी दिए गए। संदेश रूप में मू एस एस धम्मी ने चेतावनी देते हुए कहा कि, ” बाबासाहेब डॉ आंबेडकर ने कहा था कि, ब्राह्मणों में वाल्टेयर पैदा नहीं हो सकता, इसलिए उन से सतर्क रहना चाहिए। आज अगर प्रभावी मिशनरी संगठन बनाना हो तो भिक्खु संघ का तंत्र समझना अनिवार्य है, भिक्खु संघ के प्रशिक्षण तंत्र को समझना अनिवार्य है,और भिक्खु संघ का प्रचार तंत्र समझना भी अनिवार्य है। तभी हम क्रांतिकारी मिशनरी तंत्र का संगठन खडा कर पायेंगे।

(इस पूरी चर्चा को आप MNT News Network के यूट्यूब चैनल पर अथवा फेसबुक पेज पर देख सकते हैं। MNT News Network को यूट्यूब पर सब्सक्राइब करें और बेल आइकन ऑन करें । तथा फेसबुक पेज को लाइक और फॉलो करें एवं फेवरेट मोड़ पर रखें। MNT News Network टाइप करके हमें गूगल, यूट्यूब और फेसबुक पर सर्च करें।) 

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